Saturday, March 24, 2012

वह एक श्वेत फूल

अनगिनत फूलो के बीच
वह एक श्वेत फूल
उग आया था भूल से
 किन्तु बड़ा अनोखा


बाकी सारे फूल
सूरज की ऊष्मा में खिलते
शाम में बंद हो उदासी बिखेरते


पर वह एक श्वेत फूल 
खिला अपने दम पर
और अपनी पूर्ण आयु तक 


बाकी सारे फूल ख़ूबसूरत
और रंगबिरंगे थे
यह रंग विहीन हो कर भी
अपनी स्वतंत्रता में सबसे
मोहक और सुंदर .
                                            ~बंदना

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