Saturday, March 24, 2012

जीवन में आँखमिचोली

जीवन में रह कर कभी
जीवन से छिप जाना दोस्तों
बेहोश ज़िन्दगी से कभी
दो पल ही सही
होश में आना दोस्तों

भीड़ में चलते-चलते कभी
यूँ हीं राह भटक जाना दोस्तों
जिसे मंजिल समझ चले थे
तय होने पर मुकाम साबित हुआ
कभी एक मुकाम को ही सही
मंजिल समझ ठहर जाना दोस्तों

दो पल की दोस्ती ही सही
जीवन छूट जाने पर भी
हर दोस्तो के दिल पे
दोस्ती के निशान छोड़ जाना दोस्तों


                                                           ~बंदना

वह एक श्वेत फूल

अनगिनत फूलो के बीच
वह एक श्वेत फूल
उग आया था भूल से
 किन्तु बड़ा अनोखा


बाकी सारे फूल
सूरज की ऊष्मा में खिलते
शाम में बंद हो उदासी बिखेरते


पर वह एक श्वेत फूल 
खिला अपने दम पर
और अपनी पूर्ण आयु तक 


बाकी सारे फूल ख़ूबसूरत
और रंगबिरंगे थे
यह रंग विहीन हो कर भी
अपनी स्वतंत्रता में सबसे
मोहक और सुंदर .
                                            ~बंदना

बदलती तस्वीर

कितने आईने बदले
पर तस्वीर बदलती न थी
एक नजरिया जो बदला
तो सारी तस्वीर बदलती नज़र आई

लेने की चाह ने  बहुत भटकाया
लालच प्यार के दो बातोँ की ही सही
ऐसे में हर रिश्ते खोटे नज़र आये
देने लगी जब प्यार की अपनी नज़र
अपनी की तो बात ही क्या
कहा जाता था जिसे गैर
वह भी अपनो से बढ़ कर नज़र आये.

भीड़ में रहने पर
भूले रहने का भय
तन्हाई मिली तो खोने का ही रोना
अब तो भीड़ में भरने की ख़ुशी
तन्हाई में खुद से मिलने का जशन
खाली होने पर जो मिला
सब में उनकी रहमत ही नज़र आई.
                                                        ~बंदना

कुछ अधूरे ख्वाब

ऊर्जा और उल्लास के ताने बाने से
खूबसूरत कई ख्वाब बुने
कुछ पूरे हुए
कुछ रहे अधूरे

यथार्थ की ज़मीं पर
बिछे पूरे हुए ख्व़ाब
अधूरे ख्व़ाब में
कुछ रंग भरने है बाकी
वह बिछ जाएगा
खुले आसमान में
दूर, बहुत दूर तलक

                                ~बंदना